भारत में इस समय लगभग 4900 बड़े बांध हैं और लगभग 350 बांध निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त कई हजार छोटे बांध हैं। ये बांध देश की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इनकी संपत्ति प्रबंधन एवं सुरक्षा के मामले में एक प्रमुख जिम्मेदारी बनती है। अप्रैल 2012 में केंद्रीय जल आयोग (सी.डब्ल्यू.सी.) ने विश्व बैंक की आर्थिक सहायता से एक छः वर्षीय बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (ड्रिप) 2100 करोड़ रू. की अनुमानित लागत से शुरू की। इस परियोजना में मूल रूप से चार राज्यों केरल, मध्य प्रदेश, उडीसा और तमिलनाडु के 223 बांधों को पुनर्वास और सुधार परियोजना के अंतर्गत लाना था। बाद में कर्नाटक, उत्तराखंड़ (यू.जे.वी.एन.एल.) एवं झारखंड़ (डी.वी.सी.) राज्यों के जुड़ने के बाद कुल ड्रिप बांधों की संख्या 250 हो गई है। यह परियोजना नई तकनीकियों को बढ़ावा देने और केन्द्र एवं राज्य स्तरों पर बांध सुरक्षा मूल्यांकन और कार्यान्वयन तथा देश के कुछ प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंसाधन संस्थानों में बांध सुरक्षा संस्थागत सामर्थ्य में सुधार लाना है। केन्द्रीय जल आयोग का केन्द्रीय बांध सुरक्षा संगठन, एक अभियांत्रिकी और प्रबंधन परामर्श संस्था के सहयोग से परियोजना के समन्वय एवं कार्यान्वयन को रूप दे रहा है।